आखिर किसे देखकर राहुल को शायरी आ गई....

December 23, 2016, 7:33 pm
img

यूसुफ अंसारी

राजनीतिक संपादक

नई दिल्ली। कांग्रेस मुख्यालय 24 अकबर रोड पर राहुल गांधी के पिछले दो भाषणों की बड़ी चर्चा है। गुरूवार को उत्तर प्रदेश के बहराइच में हुई जनाक्रोश रैली में दिए भाषण की और शुक्रवार को उत्तराखंड के अल्मोड़ा में दिए भाषण की। दोनों भाषणों में राहुल ने शेर पढ़े। बहराइच में ग़ालिब का शेर पढ़ा तो अल्मोड़ा में बशीर बद्र का। दोनों कालजयी शायर है। दोनों शेर मयारी हैं। कांग्रेस कवर करने वाले तामम पत्रकार हैरान है किं राहुल को अचानक शायरी कैसे आ गई। पत्रकार कांग्रेसी नेताओं से पूछ रहे हैं कि आजकल राहुल के भाषण कौन लिख रहा है। नेता पलटकर पत्रकारों से यही सवाल पूछ रहे हैं।

राहुल गांधी अगर अपने भाषणों में शेर पढ़ रहे हैं तो ये जिज्ञासा होना लाज़िमी है। राहुल 2004 से राजनीती में हैं। तभी से सांसद हैं। इस बीच उन्होंने कई सौ भाषण दिए होंगे। दो चार बार संसद में भी बोले हैं। अपने भाषणों में उन्होंने शायरी का इस्तेमाल पहले कभी नहीं किया।। अब कर रहे हैं। इसके दो अर्थ है। पहला तो ये कि उनका भाषण कोई ऐसा व्यकित लिख रहा है जिसे भाषण में शेरों को मोतियों की तरह पिरोने की कला आती है। दूसरा ये कि राहुल अब बोलने में सहज हो रहे है। उनके भाषणों में रवानगी आ रही है। उनके भाषण अब पहले का तरह नीरस और उबाऊ नहीं लगते। उनमें स्वभाविकता का पुट बढ़ने लगा है। वो मोदी सरकार के खिलाफ लगातार आक्रामक भी हो रहे हैं। इसे लेकर आम जनता में भी उनकी तारीफ हो रही है। सभी मान रहे हैं कि राहुल की धीरे-धीरे अपनी छवि बदल रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी कहना पड़ा। राहुल अब बोलने लगे है। मज़ाक में ही सही। उन्होंने एक कार्यक्रम में बाकायदा राहुल की नक़ल उतारी। उनकी मजाक उड़ाई। राहुल ने भी तुर्की-ब-तुर्की जवाब दे दिया। बोले, मज़ाक चाहे जितनी उड़ा लो मगर मेरे सवालों के जवाब तो देदो। बात सही है। तर्क सही है। सरकार को जवाब देना चाहिए। विपक्षी नेताओं का हक है सवाल पूछना। सरकार की जिम्मेदरी है जवाब देना। प्रधानमंत्री मंच से राहुल गांधी के मजाक उड़ा रहे हैं। कहते हैं, उन्हें खुशी हो रही है कि राहुल अब बोलने लगे हैं। ऐसा वो दिल रखने के लिए कह रहे हैं। विपक्ष के नेता के बोलने से अगर सत्ता पक्ष को खुशी हो तो समझ लेना चाहिए कि खुशी बनावटी है। राहुल के चुप रहने या सही नहीं बोल पाने का फायदा मोदी को मिलता आया है। अब राहुल बोल रहे हैं। लगातार बोल रहे हैं। लोग  उन्हे सुन रहे हैं। पसंद कर रहे हैं। यह तो कांग्रेस के लिए खुशा की बात है। प्रधानमंत्री के लिए नहीं।

बात राहुल के शायराना अंदाज़ से हुई थी। उसी पर आते हैं। अक्सर नेता अपने भाषण मे वज़न डालने कते लिए शेरो-शायरी का इस्तेमाल करते है। शेर पढ़ते हें। कविता पढ़ते हैं। मुहावरों और कहावतों का भी इस्तेमाल करते हैं। चुटकी लेते है। तलीफ़ो भी सुनाते है। इन सबमें मिट्टी की खुशबू होती है। इनसे लगता कि बोलने वाला जमीन से जुडा है। कहां क्या इस्तेमाल करना है। ये निर्भर करता है उस जगह पर जहां भाषण दिया जा रहा है। उन लोगों को पर जो लोग सुन रहे हैं। श्रोताओं के मूड पर। कई बार मूड बदलने के लिए ये सब किया जाता है। ये वहीं कर सकता है जिसे अपने देश, समाज. लोगों के आचार-विचार, संस्कृति की व्याप समझ हो। पूर्व प्रधानमंत्रियों में अटल बिहारी वाजपेयी अपने भाषणों में अपनी कविताओं का खूब इस्तेमाल करते थे। इंद्र कुमार गुजराल अपने भाषणों में खूब शायरी का इस्तेमाल करते थे।

डॉ. मनमोहन सिंह वित्तमंत्री रहते अपने बजट भाषण की शुरुआत हमेशा गालिब के शेर से करते थे। और अंत भी। विपक्ष के नेता के रूप में अटल विहारी वाजयी भी गालिब के शेर ही मनमोहन सिंह का जवाब देते थे। बतौर प्रधानमंत्री भी संसद में और संसद के बाहर मनमोहन सिंह अपने भाषणों में शायरी के जरिए वो बाते कहीं हैं जो वो बगैर शेर के नहीं कह सकते थे। जब भाजपा ने यूपीए सरकरा पर भ्रषटाचार के आरोप लगाते हुए मनमोहन सिंह से जवाब मांगा। मनमोहन चुप रहे। भाजपा हंगामा खड़ा कर दिया। इस मनमोहन ने ये शेर पढ़ कर अपनी लाचारी जता दी, “हजार जवाबों से अच्छी मेरी खामोशी है, न जाने कितने सवालों की आबरू रख ली।”         

अब राहुल रंग में दिख रहे हैं। उत्तराखंड के अल्मोड़ा में कांग्रेस की रैली में राहुल ने नोटबंदी से देश की गरीब जनता को हो रही परेशानी का मुद्दा उठाया। बोले, नोटबंदी की वजह से 100 से ज्यादा लोग मर चुके हैं, उन्हें लोकसभा में याद करना चाहिए था। नहीं किया गया। पीएम से पूछे सवालों का कोई जवाब नहीं मिला। राहुल गांधी ने पीएम मोदी के रवैये पर तंज करते हुए बशीर बद्र को शेर पढ़ दिया, 'लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में, तुम तरस नहीं ख़ाते बस्तियां जलाने में।' ये प्रधानमंत्री पर जबर्दस्त चोट है। एक दिन पहले राहुल यूपी के बहराइच में मोदी पर निशाना साधा था। बोले, प्रधानमंत्री उनके सवालों के जवाब देने से बच रहे हैं। ' मैंने उनसे दो-तीन सवाल पूछे जिसके जवाब नहीं दिए गए लेकिन जो सवाल पूछ गए थे उसका मज़ाक उड़ाया।'  राहुल ने अपनी मज़ाक उड़ाने पर पीएम को मिर्ज़ा ग़ालिब का शेर पढ़कर आइना दिखाया। बोले, 'हर एक बात पे कहते हो कि तू क्या है, तुम्हीं कहो कि यह अंदाज़-ए-गुफ्तगू क्या है।'

राहुल का ये अंदाज़ नया है। उनके बोलने के तौर-तरीके बदल रहे हैं। 1973 में आई फिल्म बॉबी का एक गीत बहुत मशहूर हुआ था। किशोर ऋषि कपूर पर फिल्माया गया था, ‘मैं शायर तो नहीं, मगर ऐ हसीं, जबसे देखा मैं ने तुझको, मुझको शायरी आई गई।’ अब कांग्रेसी और कांग्रेस कवर करने वाले पत्रकार ये पता लगाने में लगे हैं कि आखिर राहुल ने किसे देखा कि उन्हे शायरी आ गई। य़ा यूं कहें, किसने उनके भाषण लिखे उन्हें शायरी आई गई।

Similar Post You May Like

Around The World

loading...

More News