कोहली से लड़ाई का जुर्माना भुगत रहे हैं गंभीर

September 13, 2016, 12:28 pm
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कमलकांत

नई दिल्ली। हमेशा की तरह भारतीय क्रिकेट टीम के सिलेक्शन ने एक बार फिर कई सवालों को जन्म दे दिया है। न्यूज़ीलैंड के साथ होने वाली टेस्ट सीरीज़ के टीम सिलेक्शन से साफ दिख रहा है कि अच्छा प्रदर्शन कर रहे कुछ खिलाड़ियों को नज़रअंदाज़ कर दिया गया है और टीम में बैठे कुछ खिलाड़ी जो प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं, उन्हें टीम में बनाए रखा गया है।

ये भारतीय क्रिकेट टीम की फितरत हो गई है। टीम चाहे जीते या हारे, सिलेक्टरों को कोई फर्क नहीं पड़ता है। ये कहकर टीम की हार को मामूली घटना बता दिया जाता है कि खेल में हार-जीत तो होती ही रहती है। सनस्टार का सवाल सिर्फ यही है कि ईमानदारी से चुने गए खिलाड़ी अगर ईमानदारी से प्रयास करके हार जाएं, तो कोई बात नहीं। लेकिन सवालिया चुनाव प्रक्रिया के बाद हार का ठीकरा तो किसी के सिर फूंटना चाहिए? खास तौर से उन सिलेक्टरों के खिलाफ जो सही खिलाड़ी नहीं चुनते।

इस सिलेक्शन के बाद सबसे बड़ा सवाल तो यही उठ रहा है कि आखिर रोहित शर्मा किस बात की मलाई खा रहे हैं?  दरअसल, ये सवाल कई सालों से उठ रहा है। क्रिकेट जानने वाले हर व्यक्ति को मालूम है कि रोहित टेस्ट प्लेयर नहीं हैं। जब भी उनको टेस्ट में खेलने का मौका दिया गया, वो कुछ नहीं कर पाए। टेस्ट मैचों में वो अब तक 1000 रन नहीं बना पाए हैं। हाल के वेस्ट इंडीज़ दौरे में भी वो दो मैचों में पचास रन ही बना पाए थे।

उनके सिलेक्शन को लेकर कई सालों से सवाल उठते रहे हैं। रोहित शर्मा को अपने को साबित करने के जितने मौके दिए गए, वो शायद ही भारतीय क्रिकेट में किसे को मिले हों। कुछ अच्छे खिलाड़ियों को तो साबित करने का एक भी मौका नहीं दिया गया। आज जब संदीप पाटिल से रोहित शर्मा के चुनाव के बारे में पूछा गया तो उनका वही घिसा-पिटा जवाब था। वो शानदार खिलाड़ी हैं। जी हां, टेस्ट क्रिकेट में वो ऐसे शानदार खिलाड़ी हैं जिनका प्रदर्शन औसत से नीचे ही रहता है। सवाल ये है कि आखिर रोहित में ऐसी क्या बात है कि अच्छी क्रिकेट खेल रहे खिलाड़ियों को बाहर बैठा कर रोहित शर्मा को बार बार मौका दिया जाता है। कहीं इसलिए तो नहीं को वो उन गिने-चुने महाराष्ट्रियों में बचे हैं जो भारतीय टीम में सिलेक्शन लायक हैं। कभी भारतीय टीम में मुम्बई के खिलाड़ियों की बहुतायत हुआ करती थी। अब नहीं है। क्या रोहित शर्मा के सिलेक्शन का ये कारण तो नहीं? इसके विपरीत देखिए गौतम गंभीर का प्रदर्शन। दलीप ट्राफी में पिछले तीन मैचों में बहुत अच्छा स्कोर किया है। पहले भी अच्छा प्रदर्शन करते रहे हैं। फिर भी उन्हें भारतीय टीम में मौका नहीं मिलता। गौतम गंभीर की टीम से विदाई और मैदान पर विराट कोहली के साथ उनकी झड़प की तारीखें लगभग आसपास हैं। आईपीएल के मैच में जब कोहली और गंभीर आपस में भिड़ गए थे, उसके बाद से सिलेक्टरों ने गंभीर के अच्छे प्रदर्शन को लगातार नज़रअंदाज़ किया। उनकी वापसी के सारे रास्ते बंद कर दिए गए। अच्छे प्रदर्शन के बावजूद। हाल के वेस्ट इंडीज़ दौरे में टॉप बेटिंग आर्डर का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा। और यहीं पर गंभीर अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। लेकिन इसके लिए भी बहाना है। गंभीर क्योंकि 34 साल के हैं और हम भविष्य की टीम का गठन कर रहे हैं। यानि आज चाहे हार जाओ, लेकिन भविष्य की टीम बनाते रहो। गले नहीं उतरता। क्रिकेट के एक जानकार ने कहा, गंभीर चाहे 34 साल के हों, लेकिन उनमें क्रिकेट बची है। दूसरी तरफ, जिन्हें आप ओपनिंग स्लॉट के लिए चुन रहे हैं, उनका प्रदर्शन खराब है। जानकार ये सवाल भी उठा रहे हैं कि अगर घरेलू टूर्नामेंटों में किए जा रहे अच्छे प्रदर्शनों की तरफ ध्यान ही नहीं दिया जाना, तो इन्हें बंद कर दिया जाना चाहिए। इनका कहना था कि टीम में सिलेक्शन का आधार मौजूदा प्रदर्शन होना चाहिए। भविष्य की बातें करके चयनकर्ताओं को मनमर्ज़ी नहीं करनी चाहिए। ये कहानी सिर्फ इन दो खिलाड़ियों की नहीं है। और खिलाड़ी भी हैं जिनके साथ सिलेक्टरों ने यही किया।

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