कालेधन को सफेद करने वालों पर जांच एंजेसियों की है नजर

December 2, 2016, 11:37 am
Share on Whatsapp
img

आलोक कुमार

नई दिल्ली। नोटबंदी के बाद से सरकार ने कालेधन को बाहर लाने के लिए कई नियम बदले जा रहे हैं। कालेधन को ठिकाने लगाने वालों और सरकार के बीच “तू डाल-डाल तो, मैं पात-पात ” का खेल जारी है। जांच एंजसी ने पुराने नोटों को ठिकाना लगाने वाले दिग्गज खिलाड़ियों पर नजर ढेड़ी कर दी है। गलत रास्ते अपनाने वालों पर सख्ती बरतने के लिए आयकर विभाग की छापेमारी में दो सौ गुना से ज्यादा की वृद्धि आई है। फिर भी जुगाड़ लाने वालों ने नित नए रास्ते अपनाने का कोई तरीका नहीं छोड़ रहे। जांच एजेंसियों को सुराग लगी है कि नॉन बैंकिंग फाइनैंशल कंपनी (NBFC) को लोन देकर भी लोग ब्लैक मनी खपा रहे हैं। इस लोन में तीन साल में चुकाना होता है। तीन साल तक लोन पर कोई ब्याज नहीं लगता है और फिर कुछ फर्जी दस्तावेज के जरिए यह दिखा दिया जाएगा कि लोन वापस किया जा चुका है। इसमें 20 प्रतिशत पैसा कंपनी काट रही है और बाकी ब्लैक का वाइट हो रहा है।

 

सरकार की योजना को फेल करने का सबसे खतरनाक तरीका जनधन खातों के दुरपयोग का निकाला गया। ब्लैक मीन रखने वालों ने किराए पर जनधन अकाउंट ले लिया है। जनधन के तहत खुले गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वालों के अकाउंट में 27 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा जमा कर दिए गए। सरकार ने इससे निकासी पर रोक लगाकर इस जुगाड़ का इस्तेमाल करने वालों के पसीने छूड़ाने की कोशिश की है। इसके अलावा पुराने नोटों को इधर उधर करने में निजी बैंकों की मिलीभगत काम आ रही है। पुराने और दिग्गज व्यवसायियों ने बिजनेस के आधार पर ज्यादातर बैंक अधिकारियों की प्रोन्नति में भागेदार बनने का काम किया है। अब वैसे ही बैंक मैनजर नौकरी दांव पर लगाकर हजार – पांच सौ के नोट को ठिकाने लगाने में मदद कर रहे हैं। कई जगहों पर यह काम कमीशन के आधार पर हो रहा है। ऐसा करने वालों पर जांच एजेंसियों ने नजर सख्त कर दी है। व्यवसायियों ने नोटों की खपत के लिए कर्मचारियों के वेतन भुगतान में पुराने नोटों का इस्तेमाल किया है, तो सप्लाई मार्केट के लेनदारों को आठ नवंबर से पहली की बिल बनवाकर करोड़ों के कालेधन को ठिकाने लगाने की कोशिश की गई है। आयकर विभाग को ऐसे कई कोशिश की शिकायतें जमकर मिल रही हैं।

 

नोटबंदी से पार पाने के लिए कालेधन कुबेरों ने कुछ नए रुट अख्तियार किए हैं। इसकी पकड़ आयकर छापों के दौरान हुई है। आयकर विभाग इन तरीकों का जल्द खुलासा करने वाला है। सबसे आसान जुगाड़ निजी नेटवर्क के उपयोग का रहा है। लोगों ने दोस्त, रिश्तेदार या मदद के लिए सामने आने वालों के एकाउंट में दो लाख के आसपास जमा करके टैक्स विभाग की नोटिस से बचने की कोशिश की है। जरूरत से ज्यादा होशियारी बरतने वालों पर जांच एजेंसियां शिकंजा कसने वाली हैं। इसके अलावा लोग पुराने नोटों के बदले अधिक पैसा देकर डॉलर, यूरो और पाउंड खरीद रहे हैं। विदेशी मुद्रा की कालाबाजारी में एक डॉलर के बदले 120 रुपए लिए जा रहे हैं। इसकी खपत हवाला रुट से हो रही है। आठ नवंबर की रात सोना खरीदकर पुराने नोटों की खपत करने वालों को मुंह की खानी पड़ रही है। कई ने जहां 51 हजार रुपए की कीमत पर सोना खरीदकर अपने कालेधन को सफेद करने का रास्ता निकाला, उन सबको दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। एक तो बाजार में सोने का भाव गिर कर उनके निवेश को शून्य कर दिया वहीं अब सरकार ने सोना रखने की क्षमता तय कर उनपर शिकंजा कसने का नया तरीका निकाल लिया है। इधर दिल्ली पुलिस की भ्रष्टाचार निरोधक टीम डीटीसी की ओर से जमा किए गए आठ करोड़ रुपए के हजार व पांच सौ के पुराने नोटों की जांच का काम प्रगति पर है। इसमें नोटबंदी के दौरान जिन सरकारी उपक्रमों में पुराने नोट चलने की छूट दी गई थी उनमें से ज्यादातर ने किस कदर गदर मचाया है उसका खुलासा हो सकता है।

Similar Post You May Like

Around The World

loading...

More News