उर्जित पटेल के रिलायंस से रिश्ते को लेकर उठे सवाल

August 22, 2016, 12:16 pmSpecial
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आलोक कुमार

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री से देश के सबसे धनाढ्य शख्सियत मुकेश अंबानी की मुलाकात को लेकर सोशल मीडिया पर जो तस्वीर वायरल हुई थी, उसे लेकर रिश्तों की प्रगाढ़ता का खुलासा हुआ था। अंबानी मित्रवत प्रधानमंत्री मोदी के कंधे पर हाथ रखे नजर आ रहे थे। अब रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया नए गवर्नर उर्जित पटेल के रिलायंस इंडस्ट्रीज से सीधे रिश्ते पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। 52 वर्षीय उर्जित पटेल के बारे में बताया जा रहा है कि ये रिलायंस इंडस्ट्रीज के प्रेसीडेंट ऑफ बिजनेस डेवलपमेंट हुआ करते थे।

आरबीआई में बतौर डिप्टी गवर्नर इनकी नियुक्ति प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल 2013 में हुई थी। सोशल मीडिया पर चल रहे तर्क वितर्क के जरिए बताया जा रहा है कि यह सत्ता प्रतिष्ठान से रिलायंस घराने के करीबी रिश्ते की गवाही देता है। अगर रिलांयस से जुड़े होने की वजह से ही मौजूदा सरकार ने उर्जित पटेल को आरबीआई का गवर्नर बनाया गया है, तो यही रिश्ता पिछली सरकार की वक्त भी उन्हें आरबीआई में प्रवेश करवाने का काम कर रहा था। जाहिर पर इतनी महत्वपूर्ण नियुक्ति से पहले ऐसे सुबहों और संदेह से भरे आरोपों की गंभीर पड़ताल की गई होगी। उसके नतीजे के आधार पर ही यह फैसला लिया गया होगा। उर्जित पटेल की नियुक्ति को सियासी आइने से भी देखा जा रहा है। तमाम एकडमिक योग्यताओं के साथ वह पाटीदार समाज से आते हैं। गुजरात की सियासत में आनंदीबेन पटेल की जगह गैर पाटीदार समाज के विजय रुपानी को मुख्यमंत्री बनाया गया है। ऐसे में पाटीदार समाज का सबसे बड़ा हितैषी होने का बड़ा संदेश देते हुए केंद्र सरकार ने इस समाज से जुड़े शख्स के हाथ रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की चाबी थमाया है।  

सुप्रीम कोर्ट के वकील और स्वराज अभियान के नेता प्रशांत भूषण ने उर्जित पटेल नियुक्ति की घोषणा के साथ ही ट्विट कर बड़ा बबाल खड़ा कर रखा है। प्रशांत के ट्विट में कहा है- मजे की बात है कि राजन को आरबीआई के गवर्नर पद से हटाने के लिए सरकार ने जिस व्यक्ति का चुनाव किया है उनको रिलायंस इंडस्ट्रीज के प्रेसीडेंट औऱ गुजरात स्टेट पेट्रोलियम लिमिटेड के निदेशक के नाते वित्तीय अनियमितता को लेकर सीएजी से कड़ी फटकार मिल चुकी है। नियुक्ति की घोषणा के बाद उर्जित पटेल की कंपनी को अनियमितता से सीएजी की मिली फटकार से जुड़े कागजात तक जारी किए गए हैं। गौरतलब है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया देश की अर्थव्यवस्था को नियंत्रित करता है। यह भारत का केंद्रीय बैंक है और यह भारत के सभी बैंकों का संचालक है। आगामी चार सितंबर से उर्जित पटेल इसके 24वें गवर्नर का पदभार सम्हालने जा रहे हैं। रिजर्व बैंक के आज महत्व को इस लिहाज से भी समझा जा सकता है कि मुद्रा परिचालन एवं काले धन के दोषपूर्ण अर्थव्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए आरबीआई ने 31 मार्च 2014 तक सन 2005 से पूर्व जारी किए गए सभी करेंसी को वापस लेने का निर्णय लिया है। भारतीय रिजर्व बैंक की प्रस्तावना में बैंक के मूल कार्य में "बैंक नोटों के निर्गम को नियन्त्रित करना, भारत में मौद्रिक स्थायित्व प्राप्त करने की दृष्टि से प्रारक्षित निधि रखना और सामान्यत: देश के हित में मुद्रा व ऋण प्रणाली परिचालित करना है।" यह देश की मौद्रिक नीति तैयार कर उसका क्रियान्वयन और निगरानी करता है। वित्तीय प्रणाली का विनियमन और पर्यवेक्षण करना है। इसके जिम्मे विदेशी मुद्रा का प्रंबंधन करना है। मुद्री जारी करना, उसका विनिमय करना औऱ परिचालन योग्य न रहने पर उन्हें नष्ट करना है। सरकार का बैंकर औऱ बैंकों का बैंकर के रुप में करना। साख नियंत्रित करना और मुद्रा के लेन देन को नियंत्रित करने का काम होता है। .

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