पहला वीडियो जिसके वाइरल में सच है यह वीडियो देखकर और सुनक.

October 8, 2017, 4:01 pm
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इसी सच्चाई को वरिष्ठ पत्रकार और पितामह आदरणीय रमेश नैयर भी अपने शब्दों में अलग ढंग से बोलते हैं कि वास्तव में अब पत्रकारिता बची ही नहीं है।

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अवि डांडिया- यह आदमी जो भी है और जैसा भी है और वह अपने को भले ही पत्रकार बताता है। वैसे, मुझे इसकी सच्चाई का कुछ ज्यादा पता नहीं चल पाया है कि वास्तव में यह एक पत्रकार है या नहीं। लेकिन इसने फेसबुक और ह्वाट्सएप के जरिए अपना वीडियो डालकर कुछ बताने की कोशिश की है जो एक पत्रकार के लिए न सिर्फ काफी सोचनीय है बल्कि हिन्दुस्तान के हर पत्रकारों की कारगुजारियों पर सवालिया निशान भी लगा दिया है।

बहरहाल, जैन मुनि श्री तरुण सागर जी जितना कड़वा सच बोलते हैं और जो लोगों को अंदर तक छू जाती है, कमोबेश वैसी ही वाणी और सच्चाई इस वीडियों के जरिए दिखाई गई है। इस वीडियों के माध्यम से अवि की बातों में इतनी सच्चाई नजर आती है और उन्होंने मीडिया को लेकर जो साहस बोलने का किया है, वह इस देश के सभी बड़े न्यूज चैनलों के  महारथियों को सोचने या फिर आत्म चिंतन के लिए मजबूर कर देगा। शायद इस पत्रकार को अब यह महसूस हो गया कि इस देश में यदि सच बोलेंगे तो लोग उसे देखेंगे और सुनेंगे। साथ ही, गंभीरता से भी लेंगे। लेकिन छत्तीसगढ़ के एक वरिष्ठ पत्रकार पितामह स्वरूप आदरणीय श्री रमेश नैयर जी का भी यह मानना है कि अब कोई पत्रकार नहीं बचा है। लगभग सारे लोग दलाली के काम में जुटे हुए हैं। यहां तो फोन तक की टेपिंग होती है। कहीं भी कोई खबर जैसी चीज नहीं है और हालत तो यह हो गई है कि अब  न खबर लिख सकते और न ही छाप सकते हैं। जिस पत्रकार का जितना अच्छा लाइजनिंग है, वह उतना ही बड़ा पत्रकार कहलाता है।

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पत्रकारों की इस तरह की कारगुजारियों को देखते हुए ही ऐसा माना जा रहा है कि वर्तमान समय की पत्रकारिता को अंगीकार करते हुए उन्होंने हिन्दी ग्रंथ आयोग का न सिर्फ अध्यक्ष का पदभार संभाला बल्कि राज्यमंत्री तक का दर्जा हासिल करते हुए सभी सुख-सुविधाओं का भोग भी किया। अब जबकि मीडिया की ऐसी स्थिति पर सवाल उठना शुरू हो तो यह स्वाभाविक भी है कि उन्हें भी सामने आना पड़ा और वास्तविक सच्चाई से सबको रूबरू भी कराना शुरू कर दिया है।पत्रकारों की इस तरह की कारगुजारियों को देखते हुए ही ऐसा माना जा रहा है कि वर्तमान समय की पत्रकारिता को अंगीकार करत�

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