नए सेनाध्‍यक्ष की नियुक्ति पर कांग्रेस में दो-फाड़

December 20, 2016, 1:59 pm
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यूसुफ अंसारी

नई दिल्‍ली। नए सेना अध्‍यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत की नियुक्ति को लेकर कांग्रेस में दो फाड़ हो गया है। इस मुद्दे पर पार्टी में अलग-अलग नेताओं का अलग-अलग राय सामने आई है।  पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने बीते दिनों रावत की नियुक्ति पर जमकर सवाल उठाए थे। वहीं पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि सेना प्रमुख के पद पर रावत की नियुक्ति का विरोध पार्टी को राजनीतिक रूप से नुकसानदायक साबित होगा। नए थलसेना प्रमुख की नियुक्ति का राजनीतिक विवादों में घिर गया है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी पार्टियों ने आरोप लगाया है दो वरिष्ठ अधिकारियों को नजरअंदाज करके रावत को सेनाअध्यक्ष बनाया गया है। इस मुद्दे पर कांग्रेस और वामपंथी दलों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीध सवाल कर सवाल किए तथा उनसे इस फैसले का ‘उचित कारण’ बताने को कहा। विपक्ष के हमले के बीच सरकार ने ले. जनरल बिपिन रावत को थलसेना प्रमुख बनाए जाने के फैसले को उचित ठहराया और जोर दिया कि उनका अभियानगत अनुभव तथा ‘सक्रियता’ उनके पक्ष में रही। फिलहाल कांग्रेस आलाकमान ने नेताओं को सेनाअध्यक्ष की नियुक्त पर गैरजरूरी बयानबाजी से बचने को कहा है।

सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस के कई बड़े नेता रावत की नियुक्ति का विरोध करने के पक्ष में नहीं हैं। कई आला नेताओं ने पार्टी को इससे नुकसान की आशंका आशंका जताई है। उनका मानना है कि सेनाध्‍यक्ष के विरोध से पार्टी को नुकसान होगा। कांग्रेस नेता सत्‍यव्रत चतुर्वेदी ने कहा कि सेनाध्‍यक्ष की नियुक्ति पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। गौरतलब है कि कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने रविवार को कहा था कि कि आर्मी चीफ की नियुक्ति में वरिष्ठता का ख्याल क्यों नहीं रखा गया। लेफ्टिनेंट जनरल प्रवीण बख्शी और लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद अली हरीज की जगह बिपिन रावत को प्राथमिकता क्‍यों दी गई। कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने ‘संस्थानों से छेड़छाड़’ और सेना में राजनीति करने के लिए सरकार की निंदा की। सरकार ने कल दो वरिष्ठ अधिकारियों पूर्वी सेना कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल प्रवीण बख्शी और दक्षिणी सेना कमान प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल पीएम हारिज को नजरअंदाज करते हुए लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत को नया थलसेना प्रमुख बनाया है। भाजपा ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि रक्षा बलों से जुड़े किसी मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए।

कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा कि ले.जन. रावत की योग्यता पर शक नहीं है, लेकिन सेना में वरिष्ठता का महत्व होता है। सेना जैसे संवेदनशील अंग में भी मोदी सरकार मनमर्जी से किसी को भी नहीं चुन सकती। भाकपा के डी. राजा ने कहा कि सीबीआई के कार्यकारी निदेशक, न्यायपालिका, सीवीसी जैसे पदों पर नियुक्ति भी विवादित हो गई है और इसकी जिम्मेदार सरकार है। वहीं कांग्रेस नेता शहजाद पूनावाला ने ट्वीट कर कहा कि मोदी सरकार ने यह फैसला इसलिए किया ताकि हरिज सेनाध्यक्ष न बन सकें, जो कि मुस्लिम हैं। लेकिन पार्टी प्रवक्ता मनीष तिवारी ने पूनावाला की राय से पूरी तरह असहमति जताई। मोदी सरकार के बचाव में उतरे केंद्रीय राज्यमंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कांग्रेस पर तंज करते हुए कहा कि अब 10 जनपथ से नियुक्तियों का दौर खत्म हो चुका है। सरकरा की तरफ से बताया गया कि ने सेनाध्यक्ष के रूप में सबसे वरिष्ठ पूर्वी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल प्रवीण बख्शी का दावा इस लिए इसलिए खारिज किया गया क्योंकि उनके कॅरिअर का अधिकांश समय जोधपुर में बीता। कश्मीर में उनकी सिर्फ सिर्फ दो पोस्टिंग रहीं। वहीं पदानुक्रम में दूसरे दक्षिणी कमान के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल पीएम हारिज इसलिए खारिज किए गए क्योंकि उनके पास पास नियंत्रण रेखा या आतंकवाद के खिलाफ अभियानों का ऑपरेशनल अनुभव नहीं है। पदानुक्रम में तीसरे स्थान पर रहे उप-सेनाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत को मौजूदा परिदृश्य को देखते हुए सेना प्रमुख बनाया गया है। रावत को अशांत  इलाकों में काम करने का जबर्दस्त अनुभव है। वो तीन दशकों में कई अहम जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। कई बड़े सैन्य अभियानों की कमान संभाली है। पाक सीमा, चीन से जुड़ी वास्तविक नियंत्रण रेखा और पूर्वोत्तर क्षेत्रों में ऑपरेशनल जिम्मेदारियां निभाईं हैं।

गौरतलब है कि सैद्धांतिक रूप से सरकार किसी को भी सेना प्रमुख नियुक्त करने के लिए स्वतंत्र है। परंपरा के मुताबिक सेना अध्यक्ष की नियुक्ति में हमेशा ही वरिष्ठता के सिद्धांत का पालन किया जाता है। लेकिन इससे पहले 1983 में सेना प्रमुख की नियुक्ति में वरिष्ठता क्रम की अनदेखी की गई थी। तब तात्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने लेफ्टिनेंट जनरल एसके सिन्हा की जगह जनरल एएस वैद्य को सेना प्रमुख बनाया था। कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने कहा है सेना में वरिष्ठता बहुत अहम होती है। सरकार ने इसे राजनीतिक कैरणों से तोड़ा है। इसके जवाब में भाजपा प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा ने कहा है कि रावत पर फैसला वर्तमान चुनौतियों के चलते क्षमता और योग्यता के आधार पर हुआ। सरकरा नहीं बल्कि विपक्षी दल इस पर राजनीति कर रहे हैं। उन्हें राजनीति से बाज आना चाहिए।

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