मोदी अपने बयानों से ही कर रहे हैं पाक की नाक में दम

November 26, 2016, 11:11 am
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कमलकांत

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने बयानों से ही पाकिस्तान की नाक में दम कर रखा है। मोदी ने आज भठिंडा में एक बार फिर सिंधु जल संधि का मुद्दा उठा दिया। मोदी ने रैली में कहा कि सिंधु नदी का जो बूंद-बूंद पानी पाकिस्तान चला जाता है, वह जम्मू कश्मीर, पंजाब और भारत के दूसरे राज्यों को मिलेगा। मोदी का कहना था कि यह पानी पंजाब को मिल जाएगा तो यहां की मिट्टी सोना उगलेगी। उन्होंने कहा कि कोई कारण नहीं है कि हम अपने हक का इस्तेमाल न करें और हमारे किसान पानी के लिए तड़पते रहें। दरअसल, मोदी का बयान तो पंजाब के चुनाव के मद्देनज़र था, लेकिन इसका असर सीमा के इसपार और उसपार दोनों तरफ होना तय है। मोदी के बयान पर गहरी नज़र डाली जाए तो माना जाना चाहिए कि मोदी का अगला निशाना सिंधु जल संधि है। सूत्रों के अनुसार मोदी इस संधि का पुर्नविचार करने के मूड में नहीं हैं। लेकिन वह इस संधि की उन तमाम धाराओं को अमल में लाने पर विचार कर रहे हैं जो भारत के पक्ष में हैं। और जिनको अब तक अमल में नहीं लाया गया है। इतना करने भर से ही पाकिस्तान दिक्कत में आ जाएगा।

सिधुं जल संधि के तहत छह नदियां आती हैं। सिंधु इसमें मुख्य नदी है और एक मत यह दिया जाता है कि सिंधु के नाम के कारण ही इसके पार और आसपास रहने वाले लोगों को हिंदू कहा गया। इसके अलावा इसकी पांच सहयोगी नदियां हैं। झेलम, और चेनाब। इन दोनों नदियों और सिंधु का पानी सिंधु संधि के तहत पाकिस्तान को जाता है। इसके नीचे की तीन नदियों –रावी, व्यास और सतलुज- के पानी के इस्तेमाल का हक भारत को दिया गया है। अगर इन छहों नदियों के पानी का हिसाब-किताब किया जाए तो भारत को मात्र 20 फीसदी ही पानी मिलता है जबकि सभी नदियां भारत से या तो निकलती हैं या इनमें पानी की भराई मुख्य रूप से भारत में होती है। अस्सी फीसदी पानी पाकिस्तान के पास जाता है। इसलिए भारतीय विशेषज्ञ इस संधि को भारत विरोधी मानते हैं और इसकी पुनर्समीक्षा की मांग करते हैं।

भारत के हिस्से जो 20 फीसदी पानी आता है, उसका भी भारत पूरा उपयोग नहीं कर पाया है। जानकारों के अनुसार, जहां सतलुज-ब्यास के पानी का लगभग पूरा उपयोग होता है, वहीं रावी के पानी का लगभग तीस फीसदी हिस्सा भारत नहीं रोक पाता और वह पाकिस्तान चला जाता है। खास तौर से बरसात के दिनों में। इस तीस फीसदी पानी को भारत में ही रोककर इसका लाभ उठाया जा सकता है। इसके अलावा संधि ने भारत को यह भी हक दिया है कि वह ऊपर की तीन नदियों सिंधु, झेलम और चेनाब के पानी का इस्तेमाल बिजली पैदा करने के लिए कर सकता है। और इसके लिए लगभग एक हफ्ते तक पानी को रोक भी सकता है। भारत ये सारे लाभ अब तक नहीं ले पाया है। इन नदियों पर कुछ तो बांध बनाए गए हैं। लेकिन भारत के हर प्रयास पर पाकिस्तान अड़ंगा लगाता रहता है।

जानकारों का मानना है कि भारत इन बांधों का इस्तेमाल बिजली पैदा करने के अलावा हथियार के रूप में भी किया जा सकता है। पाकिस्तान जिस तरह से भारत को ज़ख्म देने के लिए हर नापाक तरीका अपना रहा है, भारत भी अगर पानी का इस्तेमाल हथियार के रूप में करता है तो इसमें कुछ गलत नहीं होगा। जानकारों का कहना है कि पाकिस्तान अगर भारत में कोई बड़ी आतंकवादी घटना करता है तो पानी के ज़रिए भी भारत उसे सबक सिखा सकता है। मोदी ने आज साफ कहा कि वह सिंधु जल के पानी की बूंद बूंद का इस्तेमाल भारत के किसानों के लिए करेंगे। अगर सिंधु संधि के तहत भारत शुरुआती तौर पर सारी धाराओं को ही लागू कर दे तो यह भी एक बड़ी कामयाबी होगी। न केवल इसका फायदा भारतीय किसानों को होगा, बल्कि पाकिस्तान को एक बड़ी चेतावनी भी मिल जाएगी कि अगर वह नहीं सुधरा तो भारत सिंधु संधि के पुराने स्वरूप को बदल भी सकता है।

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