कांग्रेस ने यूपी में तय किए सौ उम्मीदवारों के नाम

August 12, 2016, 12:35 pmSpecial
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यूसुफ अंसारी

नई दिल्‍ली। कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में अगले साल के शुरू में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए करीब सौ उम्मीदवारों के नाम तय कर लिए हैं। पार्टी चुनाव की घोषणा से छह महीने पहले इन उम्मीदवारों को मैदान में उतारने को लेकर पसोपेश में है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि सही समय पर इनकी उम्मीदवारी का एलान किया जाएगा।

यूपी की चुनावी टीम से जुड़े एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने बताया इस बार उम्मीदवारों के चयन के मामले में बरसों पुरानी एके एंटोनी कमेटी की सिफारिशों को लागू करेगी। 2002 में यूपी चुनाव मे करारी हार के बाद कांग्रेस ने एके एंटोनी की अध्यक्षता में कमेटी बनाई थी। इस कोमटी ने सिफारिश की थी कि यूपी में अगर कांग्रेस को सत्ता में आना है तो वहां उसे चुनाव से कम से कम छह महीने पहले अपने उम्मीदवार मैदान में उतार देने चाहिए। मायावती बसपा के उम्मीदवार कम से कम साल भर पहले ही मैदान में उतार देती हैं। इसके जवाब में सपा ने भी चुनाव से काफी पहले उम्मीदवार उतारना शुरू किया। कांग्रेस का उम्मीदवार मतदान से महज पंद्रह-बीस दिन पहले ही मैदान में आता है। मतदान तक वो पूरे विधानसभा क्षेत्र तक पहुंच ही नहीं पाता। एंटोन कमेटी की इस रिपोर्ट पर कांग्रेस ने कई बार अमल करना चाहा लेकिन टिकट पाने मे नाकाम रहने वालो की बगावत के डर से वो ऐसा नहीं कर पाई। अभी भी इसी को लेकर पार्टी पसोपेश में है।

सूत्रों के मुताबिक पार्टी ने पिछले चुनाव में जीती हुई सभी सीटों पर और उन सीटों पर उम्मीदवारों के नाम तय कर दिए हैं जिन पर वो पिछले चुनाव में दूसरे स्थान पर थी। सिटिंग गैटिंग फॉर्मूले के तहत सभी मौजूदा विधायकों का टिकट पक्का है। क्रॉस वोटिंग के चलते पार्टी से निकाले गए विधायकों की जगह भी पार्टी ने विकल्प तलाश कर लिए हैं। पार्टी ने पिछल चुनाव में कम अंतर से हारने वाले उम्मीदवारों पर एक बार फिर दांव खेलने का मन बनाया है। इस तरह 29 जीती हुई और 31 दूसरे स्थान पर रहने वाली सीटों पर पार्टी नाम तय कर चुकी है। पार्टी ने करीब 40 ऐसी सीटें छांटी है जहां सपा-बसपा के उम्मीदवारों के जातीय समीकरण देखकर पार्टी जिताऊ उम्मीदवार देकर खेल बिगाड सकती है। सूत्रों के मुताबिक इन उम्मीदवारो के चयन में प्रियंका गांधी ने भी अहम भूमिका निभाई है।

 

कांग्रेस के पास यूपी मे खोने क कुछ नहीं है जबकि पाने को पूरा प्रदेश पड़ा है। इसी लिए पार्टी इस बार पूरे जी जान से चुनाव मैदान मे उतरना चाहती है। दरअसल पार्टी ये आंकलन कर रही है कि उसके उम्मीदवारों के ऐलान से बगावत का स्तर क्या होगा। अगर बड़े पैमाने पर बगावत हुई हो कांग्रेस का खेल बिगड़ सकता है। लिहाजा चुनावी रणनीति कार फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं। चुनाव में अभी छह महीने बाकी हैं। पार्टी को डर है कि अभी उम्मीदवारों के ऐलान से पार्टी में बगावत हो सकती है। टिकट पाने से चूकने वाले दावेदार दूसरी पार्टी का टिकट पाकर पेरटी को नुकसान पहुंचा सकते हैं। 

सूत्रों के मुताबिक यूपी के प्रभारी महासचिव गुलाम नबी आजाद ने उम्मीदवारों के चयन में प्रशांत किशोर से भी सलाह मशविरा किया है। बाद में प्रियंका गांधी से चर्चा कर उम्मीदवारों के नामों को अंतिम रूप दिया गया। उम्मीदवारों की इस लिस्ट पर सोनिया और राहुल ने भी मुहर लगा दी है। सूत्रों के मुताबिक उम्मीदवारों के चयन में धारिमक संतुलन के साथ ही जातीय समीकरणों के खास ख्याल रखा गया है। कांग्रेस का पुराना वोट बैंक रहे ब्राह्मण राजपूत और मुस्लिमों के साथ ही पिछड़ों और दलितों के तरजीह दी गई है। पिछड़ों में गैर यादवों जातियों कुर्मियों, पाल, मौर्य, कश्यप, सैनी और कुशवाहा जैसी जातियों को तरजीह दी है तो दलितों में मायावती के वोट बैक जाटवों के मुकाबले गैर जाटव दलितों जैसे वाल्मीकि को तरजीह दी गई है। इस बात का ख्याल रख गया है कि उम्मीदवार हर तरह से जिताऊ हों और चुनावी मैदान में मजबूती से डटे रहें। सूत्रों के मुताबिक पार्टी आलाकमान ने इन सभी संभावित उम्मीदवारों को अपन-अपने चुनाव क्षेत्रों में पूरी तैयारी के साथ डट जाने को कह दिया है। इन सभी कोसाफ हिदायत दी गई है कि कोई कहीं भी ये नहीं कहेगा कि उसका टिकट पक्का हो गया है। सही मौका देख कर पार्टी खुद उम्मीदवारी का ऐलान करेगी। पार्टी सूत्रों के मुताबिक चुनाव मैदान में इन उम्मीदवारों की हैसियत देख कर ही पार्टी आखरू फैसला करेगी। चुनावी घमासान में कमजोर पड़ने वाले या पार्टी संगठन को दरकिनार कर चुनावी तैयारी करन वालों का नाम आखरी वक्त में बदला भी जा सकता है।

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