नीतीश ने साधा बीजेपी नेताओं से संपर्क

September 21, 2016, 12:48 pm
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कमलकांत

नई दिल्ली। बिहार में लालू प्रसाद के रुख से दुखी नीतीश कुमार ने बीजेपी नेताओं से संपर्क साधा है। बिहार सरकार चलाने में लालू प्रसाद यादव उनपर ज्यादा दबाव बनाते हैं तो नीतीश बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बना सकते हैं।

बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं ने इन मुलाकातों की पुष्टि की है। अभी ये मुलाकातें शुरुआती दौर की हैं। नीतीश की तरफ से साफ संदेश दिए गए हैं कि वो लालू प्रसाद के साथ सकून में नहीं हैं। वो आरजेडी की सियासी इच्छाओं की पूर्ति नहीं कर पा रहे हैं।

सूबे में हुई कई घटनाओं को लेकर आरजेडी और नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल (यू) में मतभेद सामने आते रहे हैं। हाल में दोनों दलों के बीच आरजेडी के नेता शहाबुद्दीन को लेकर तनातनी बनी हुई है। ज़मानत मिलने के बाद शहाबुद्दीन ने नीतीश पर तीर छोड़ने शुरू कर दिए थे। दोनों के बीच तनातनी इसी बात से समझी जा सकती है कि बिहार के सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल कांग्रेस को कहना पड़ा था कि आरजेडी अगर गठबंधन छोड़ना चाहे तो छोड़ सकती है। लालू-नीतीश में कई और मुद्दों पर भी तल्खी हो चुकी है।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, नीतीश के करीबियों ने अरुण जेतली से मुलाकात की है। खुद नीतीश ने भी अरुण जेतली से फोन पर बात की है। नीतीश और बीजेपी में इस बात को लेकर भी बातचीत हो चुकी है कि दोनों दलों के बीच आगे के राजनीतिक समीकरण क्या होंगे। इस बातचीत से वाकिफ जानकारों का कहना है कि नीतीश अब अपने लिए केंद्र में कोई भूमिका नहीं देख रहे। वो चाहते हैं कि बीजेपी के साथ पहले के फार्मूले की तरह ही वो प्रदेश के नेता और मुख्यमंत्री रहेंगे और केंद्र में नरेंद्र मोदी का समर्थन करेंगे।

जानकारों का मानना है कि नीतीश कभी भी इस कदम को उठा सकते हैं। ये फैसला 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले होने की उम्मीद है। जानकारों का कहना है कि नीतीश अपनी छवि को लेकर बेहद संजीदा हैं। पिछले कुछ समय से हो रहे घटनाक्रम में उनकी साफ छवि पर दाग लग रहा है। खासतौर से शहाबुद्दीन के प्रकरण के बाद। नीतीश की परेशानी ये है कि वो अपने बिहार में कभी सत्ता में नहीं आ सकते। और न ही वो लोकसभा में बड़ी संख्या में सीटें ही निकाल सकते हैं। सत्ता में आने के लिए उन्हें या तो आरजेडी-कांग्रेस का सहारा चाहिए या बीजेपी और उसके सहयोगियों का। आरजेडी से साथ चुनाव लड़कर भी विधानसभा में उनकी सीटें आरजेडी से कम ही हैं। लेकिन उनकी निजी छवि प्रदेश के सभी नेताओं पर भारी पड़ती है। इसलिए कम सीटें होने के बावजूद वो मुख्यमंत्री हैं।

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