बेहिसाब दौलत वालों को एक मौका और

November 26, 2016, 11:06 am
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आलोक कुमार

नई दिल्ली। नोटबंदी को लेकर मचे घमासान के बीच केंद्र् सरकार ने बेहिसाब दौलत वालों को एक और मौका देने की तैयारी में है। इसके लिए आयकर कानून में संशोधन करने की तैयारी की जा रही है। इसके अलावा सहकारी बैंकों को नियोजित करने के लिए नए प्रावधान किए जा रहे हैं। पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह की ओर से राज्यसभा में उठाए गए सवाल औऱ जमीनी हकीकत के अध्ययन के आधार पर यह किया जा रहा है। इसे लेकर अगले हफ्ते सरकार की ओर से संसद में विधेयक पेश हो सकता है। इस संशोधन के जरिए आठ नवंबर के बाद बैंकों में जमा बेहिसाब संपत्ति पर ज्यादा कर लगाने का प्रावधान किया जा सकता है। 

 सूत्रों के अनुसार नोटबंदी के ऐलान के बाद जमा कराए गए पैसे पर दो तरह से कर लगाए जा सकते हैं। अघोषित आय रखने वालों के धन पर पचास फीसदी टैक्य आयद की जाएगीं औऱ उन्हें अपने धन को अगले चार साल के लिए भूलना होगा। इस योजना को नहीं मानने वालोों पर सरकार साठ फीसदी या उससे अधिक जुर्माना लगा सकती है। इस बाबत वित्त मंत्रालय में तैयारी शुरु कर दी गई है।

सहकारी बैंकों को प्रक्रिया से दूर रखने के पीछे वित्त मंत्रालय का तर्क है कि ज्यादातर सहकारी बैंक मनमौजी के शिकार हैं। उनपर सहकारी नेताओं का कब्जा है। उनके लेनदेन का कोरा हिसाब सरकार के पास नहीं है। एक बार उनको नोटबंदी के दौरान पांच सौ व हजार के पुराने नोटों को बदलने की छूट दी जाती तो उसके जरिए बेहिसाब दौलत वाले सरकार के जद में आने से बच जाते। उन्हें नियमित बैंकों में विशाल धनराशि जमा करने से बचने का रास्ता मिल जाता। विपक्ष के बढ़ते दबाब के बीच रिजर्व बैंक ने किसानों की मदद के लिए सहकारी बैंकों में नकद की कमी दूर करने के लिए 2500 करोड़ रुपए अलग से जारी किए हैं।  

दरअसल संसद में विपक्ष के हो हंगामे और सड़कों पर प्रदर्शन की तैयारी के मद्देनजर केंद्र सरकार नहीं दिखना चाहती कि वह अपने फैसले पर अडियल रुख अपनाए हुए है। सरकार की कोशिश है कि नए संशोधन विधेयक पर बहस के जरिए विपक्ष की सहमति हासिल की जाए औऱ नोटबंदी के फैसले को लोकतांत्रिक जामा पहनाया जा सके। समूचा विपक्ष नोटबंदी पर सरकार के एकपक्षीय रुख की वजह से विफरा हुआ है। ज्यादातर विपक्षी नेता नोटबंदी पर सहमति जताने के बावजूद इसे लागू करने के तरीके से खफा हैं। नाराजगी की दूसरी वजह सहकारी बैंकों को पूरी प्रक्रिया से अलग रखना है।

बहरहाल बेहिसाब दौलत वालों को एक औऱ मौका देने के मद्देनजर कैबिनेट ने फैसला लिया है। यह योजना कैबिनेट की ओर से टैक्स कानूनों को मंजूर किए जाने के एक दिन बाद सामने आई है। गौरतलब है कि नोटबंदी केबाद लोगों से कहा गया कि वे अपना पैसा बैंकों में जाम कर दें। हालांकि, काला धन रखने वालों के लिए इसका हिसाब देना होगाय़ सरकार के इस कदम का विपक्षी दल विरोध कर रहे हैं. विपक्ष का कहना है कि नोटबंदी के फैसले से आम लोगों को दिक्कत हो रही है. पिछले सात दिनों से संसद की कार्यवाही इसी मुद्दे पर बाधित है. शुक्रवार को पीएम मोदी ने विपक्ष का नाम लिए इस मुद्दे पर हमला बोला और कहा कि विपक्ष ये आरोप लगा रहा है कि नोटबंदी को लागू करने के लिए सरकार ने तैयारी नहीं की। पीएम ने कहा कि दरअसल काला धन रखने वालों को मौका नहीं दिया गया इसलिए वे भड़के हुए हैं।

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