सबका साथ, सबका विकास, दिल्ली का उल्लास- मनोज तिवारी

December 7, 2016, 5:01 pm
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दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं देने की बात, हमने नहीं की। ऐसे महत्वपूर्ण फैसले करने से पहले उसमें ऐसे सख्त प्रावधान किए जाएं, जिससे उसका कोई दुरुपयोग न कर सके। यदि अरविंद केजरीवाल जैसे लोग मुख्यमंत्री रहे और सख्त प्रावधान नहीं किए गए, तो देश के सामने संकट खड़ा हो जाएगा। दिल्ली के मुख्यमंत्री धरने पर बैठ गए। यह बड़ा विषय है इसकी समीक्षा होनी चाहिए। मनोज तिवारी का मानना है कि उन्होंने दिल्ली को राज्य के दर्जा देने को कभी गलत नहीं कहा लेकिन इसकी समीक्षा तो होनी चाहिए। वे दिल्ली में आने वाला हर चुनाव जीतेंगे। कैसे और क्या होगी रणनीति। दिल्ली के लिए क्या कुछ सोच रखा है, इन सभी मुद्दों पर भाजपा दिल्ली प्रदेश के नवनियुक्त अध्यक्ष मनोज तिवारी से संवाददाता मानवेंद्र ने खास बातचीत की।  

दिल्ली के प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त होने पर सन स्टार परिवार की ओर से बधाई।
मैं भी धन्यवाद करता हूं सभी कार्यकर्ताओं का, दिल्लीवासियों का और मीडिया का। जिनके प्रेम के कारण हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह जी ने माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने मुझे इतना बड़ा गरीमामय पद दिया। मैं धन्यवाद करता हूं संगठन का। जिन्होंने मुझे इस लायक समझा।
अगले साल निगम चुनाव है। आपके अध्यक्ष काल का पहला चुनाव है इसके लेकर आपकी क्या रणनीति होगी।
आम आदमी पार्टी को बेनकाब करेंगे। और अगले साल निगम चुनाव में पार्टी की जीत सुनिश्चित करेंगे। केजरीवाल बांटो और राज करो की नीति पर चल रहे हैं। दिल्ली मिनी इंडिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपने के अनुसार मैं राजधानी के विकास सुनिश्चित करने की कोशिश करूंगा। मुझे पूरा विश्वास है कि दिल्ली में आने वाला भविष्य का हर चुनाव जीतेंगे। हमें विश्वास है हमारी कार्यनीति पर और हमारी पार्टी की ईमानदारी पर। क्योंकि दिल्ली को छला गया है। दिल्ली को बड़ा धोखा मिला है। आज मैं सेवा बस्ती में करोलबाग बिना मीडिया को बताए गया। रियल्टी चेक पर गया था। उनकी घर खाना खाया। करीब बीस लोग खाना खा रहे थे। खाने खाते समय काफी बातें हुई। लोग बहुत खुश दिखें। हम आपको बता दें कि उनके घर में एक छोटा सा बच्चा था। दो साल का बच्चा मोदी जिन्दाबाद, मोदी जिन्दाबाद नारा लगा रहा था। तय है कि पांच घंटे में तो इसे सिखाया नहीं गया होगा। इसका तात्पर्य है कि इन बस्तियों में ऐसी भावना आने लगी है कि नरेंद्र मोदी गरीबों के मसीहा हैं, तो हम उनके छोटे से सिपाही हैं दिल्ली को नरेंद्र मोदी का सपना है। भाजपा का सपना है कि दिल्ली देश की राजधानी है। यहां रहने वाला हर व्यक्ति सुविधा पाने का हकदार है, लेकिन आज की जो दुर्व्यवस्था है, उसके जो जिम्मेदार हैं। मैं ग्राउंड पर जाकर सवाल पूछना चाहता हूं। बस्ती से सवाल पूछा। बस्ती में मां समान महिला ने हमें गुलक दे दिया और कहां, जाओ केजरीवाल को अंत करो। इस गुलक में दलित समाज की भावना तो है, भले ही पैसे कम हों। हमारे दलित बस्ती के भाई बहन अरविंद केजरीवाल जी आपसे क्यों खपा हो गए हैं। मैं आपको वीडियो दिखाता हूं। मैं नया जरूर हूं। मैं दिल्ली के लिए नया नहीं हूं। मैं दिल्ली में लोदी कॉलोनी में बरसाती में रहा हूं। जो व्यक्ति बरसाती यानी सरर्वेंट क्वार्टर में रहा हो उसको दिल्ली का दर्द और सपना जरूर पता है।
आप लोकप्रिय गायक हैं, अभिनेता हैं, बहुत व्यस्त कार्यक्रम में रहे हैं। सासंद के तौर पर भी आपकी काफी जिम्मेदारी होती है। अब प्रदेश अध्यक्ष बनने पर आपकी जिम्मेवारी और बढ़ गई है। हम जानना चाहते हैं कि पहले की जिम्मेदारी और अब के जिम्मेदारी में क्या अंतर है।
जमीन आसमान का अंतर है। स्टारडम की लाइफ जब थी उन दिनों समय के हम खुद मालिक होते थे। अब हमारे समय की जनता मालिक है। हमें उसके समय के अनुसार जागना है, सोना है। आना है, जाना है। लेकिन मैं दिली से बता रहा हूं। क्योंकि मैं नरेंद्र मोदी के साथ काम कर रहा हूं। मैं हर पल पार्टी को ईमानदार और जनप्रिय सफलता मिलें ऐसे राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह जी के साथ काम कर रहा हूं। मुझे लग रहा है इस समय जीवन का सबसे अच्छा कार्य कर रहा हूं। दिल्ली की लोगों की बड़ी अपेक्षाएं हैं। और मुझे ऐसा लगता है पंद्रह बीस साल बहुत होता है। भाजपा सरकार में नहीं है तो इन बीस सालों में दिल्ली के साथ कई छल हुए हैं। चाहे अनियमित कॉलनियों को नियमित बनाने का प्रपंच हो, छल हो यह सत्तर वादों में उलझाएं रहने का छल हो। इन सबसे दिल्ली उभरे इसके लिए काम कर रहा हूं। सचमुच मुझे बहुत आनंद आ रहा है। मुझे लग रहा है कि दिल्ली का कुछ कर्ज था। इसी दिल्ली में आकर के गुलशन कुमार से मिला और गायन कार्य शुरू हुआ। मुझे तो सफलता दिल्ली से मिली। दिल्ला का कर्ज चुका पाऊंगा ऐसा मेरा विश्वास है।
आप क्षेत्रों में जहां जाते हैं, वहां भाषण कम गाने की मांग काफी होती है। जनता कहती है दो गाने सुनाइए। अब आपका रोल है प्रदेश अध्यक्ष का। इस दौर में कैसे ढ़ालेंगे। गाना के माध्यम से जनता को संबोधित करेंगे या संबोधन के माध्यम से गाना को पेश करेंगे।
देखिए। नेताओं ने इतना झूठा भाषण दे दिया है कि लोगों को भाषणों से परहेज हो गया है। भाषण देने वाले पर विश्वास नहीं हो रहा है तो जनता नहीं सुनना चाहेगी। इतने दिनों तक गाना सुनने के बाद मनोज तिवारी की छवि उनके दिल पर अंकित है, उसको पता है ये बंदा जो कहेगा, वही करेगा। इसमें बीस साल में कोई ऐसे काम नहीं किया, जिससे इसकी बदनामी हो सके। तो फिर आगे भी उसी रास्ते पर चलेगा। यह तो विश्वास है लोगों का। भाषण देने की जरूरत नहीं। हम तो काम करने आए हैं। जो नीतियां बनेगी उसे बताने का काम करेंगे। वो उसको जमीन पर मूर्त रूप देने का काम करेंगे।
दिल्ली में अभी बहुत सारी समस्याएं हैं। आपके दिमाग में कुछ होगा कि क्या जरूरत है राजधानी में।
दिल्ली को जरूरत है गंभीर प्रयास करने की। जिससे पर्यावरण की शुद्धता हो। पर्यावरण को बचाया जाए। ट्रैफिक को कम किया जाए। ट्रैफिक जाम से मुक्ति मिलें। और दिल्ली को ग्रीन कैसे बनाया जाए इसकी बात करते हैं। ये तीनों मुद्दे दिल्ली सरकार अपने फायदे के लिए कुछ करती है, फिर चली जाती है।
जिस प्रकार से अरविंद केजरीवाल आए और दिल्ली पर शासन कर रहे हैं। आप भी अन्ना आंदोलन में स्टेज पर गए थे।
मैंने कभी कल्पना नहीं की थी, एक पार्टी जो जोर-शोर से गाना गाते हुए आएगी इंडिया अगेंस्ट करप्शन। वो हो जाती है पार्टी विथ करप्शन। आप विरोध कर रहे हैं विमुद्रीकरण का। तो आप ही बताओ की आखिर भ्रष्टाचार का क्या रास्ता है। ब्लैक मनी का क्या रास्ता है। आप कुछ सुझाव नहीं दे रहे हैं। आप केवल कह रहे हैं ये मत करो। आपने समय नहीं दिया।
केंद्र की हर बात पर गलत अर्थ निकाला जाता है क्या उनकी रणनीति तो नहीं है।
हमसे कहें कि रणनीति क्या होगी। पहले तो यह रणनीति शब्द ही गड़बड़ है रण माने तलवार, खून खराबा, विध्वंस। रण की जगह कार्य लाइए। दिल्ली सरकार कार्यनीति नहीं, केवल रणनीति बना रही है। दिल्ली को रणनीति नहीं, कार्यनीति चाहिए।
दिल्ली में अब मनोज तिवारी का नगाड़ा बज रहा है। लेकिन पूर्वांचली को कहीं छोड़ तो नहीं देंगे। क्योंकि शीला दीक्षित भी पूर्वांचलियों को बोझ तक कह डाला था।
पूर्वांचल फैक्टर को तवज्जो न दीजिए। संगठन को क्षेत्रीय आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए। कुछ लोग मनोज तिवारी पूर्वांचली है, हम क्यों, हमें क्यों वर्गीकरण करने में लगे हैं। यह सोच ही गलत है। हमने एक लाइन लिया है। सबका साथ, सबका विकास, दिल्ली का उल्लास।
आप कलाकार हैं, क्या संगठन में कलाकारों को जगह देंगे।
मेरा मानना है कि समाज के हर हिस्से का समावेश होना चाहिए। यह संवैधानिक रूप से है। कलाकारों को राज्यसभा में भेजा जाता है, अगर कलाकारों की रूचि है तो हमारी पार्टी के साथ कार्य करने के लिए तो उनका स्वागत सम्मान करेंगे।
संगठन से तालमेल में आपको दिक्कत भी आएगी। गुटबाजी भी है। कैसे तालमेल बैठाएंगे।
देखिए। कोई अच्छी चीज लेने में मेरा कोई इगो नहीं है। जो ऐसा व्यक्ति होता है, सब कर लेता है। जगदंबा हैं, सरस्वती मेरा विचार अच्छा रखे।
आरटीआई से पता चला है कि दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के ऑफिस में 63 लोग काम कर रहे हैं, जिसमें 7 ओएसडी और दस से ज्यादा चपरासी है। बहुत बड़ा स्टॉफ है।
इस देश में बड़े से बड़े पद पर कार्य करने वाले भी इसका आधा भी स्टॉफ रखते हैं कि नहीं, सोच का विषय है। इतने स्टॉफ रखना, कहां से वेतन जा रहा है। किस व्यवस्ता के तहत स्टॉफ रखे गए हैं, एक प्रकार से यह प्रश्नचिह्न खड़ा करता है और जांच का विषय भी है।
ऐसे आरोप लग रहे हैं कि दिल्ली सरकार अपने कार्यकर्ताओं की नियुक्तियां की है।
मुझे विस्तृत जानकारी हासिल करनी होगी। फिर बात करेंगे।      
आपने भी केंद्र में भाजपा के सांसदों की तरह दिल्ली के पार्षदों के बैंक खातों का डिटेल मांगा है। क्या मकसद है। 
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह जी ने एमपी और एमएलए से 8 नवंबर के बाद से 30 दिसंबर तक खातों की जमा निकासी की डिटेल मांगी है, उसी तरह से हमने दिल्ली के पार्षदों से अपने खातों की जानकारी देने के निर्देश दिए हैं, लेकिन मैं केजरीवाल से भी उम्मीद करता हूं कि वो भी अपने विधायकों और मंत्रियों के खातों की जानकारी मंगाएंगे। नोटबंदी के बाद कितना, किसके खाते में जमा हुआ, इसकी जानकारी लेंगे, ऐसे उम्मीद उनसे करता हूं, क्योंकि ये पार्टी तो ईमानदारी के नाम पर चुनी गई है।
नोटबंदी के बाद लोगों के बीच जाकर उन्हें पार्टी के पक्ष में समझाना और दिक्कतों को दूर करना आपके लिए कितनी चुनौती है।
सैलरी वाले दिन, बैंकों की लाइन में दिक्कत हो रही है, लेकिन पीएम ने पचास दिन का वक्त मांगा है, जो तीस दिसंबर तक है, इस दौरान लोगों से मैं हाथ जोड़कर अपील करता हूं कि वो तकलीफ उठा लें, थोड़ी परेशानी होगी, लेकिन भविष्य अच्छा है। मोबाइल बैंकिंग के प्रति जनता में जागरूकता लाने के लिए दिल्ली में अनेक बाजारों एवं आवासिय परिसरों में जनसंपर्क अभियान चलाया गया है। मैं खुद वरिष्ठ नेताओं एवं जिलाध्यक्षों ने लगभग 600 से अधिक स्थानों पर जागरूकता अभियान चलाया और लगभग 100 से अधिक स्थानों पर नागरिक संगठनों के बीच इस संदर्भ में पॉवर प्वाइंट प्रस्तुति भी की गई है और अभी जारी है।
नोटबंदी पर और आपने क्या-क्या योजना चला रहे हैं।
मेरा मोबाइल, मेरा बटुआ। कैशलेस बैंकिंग इसको देश को समझने की जरूरत है। हम कैशलेश की बात कर रहे हैं। कैश फ्री की बात नहीं कर रहे हैं। ताकि इससे ब्लॉक मनी वाले फिर अपने बिस्तर के नीचे नोट नहीं रख सके। और एक साफ रास्ता है, ना बैंक जाने का झंझट, ना ही लाइन लगने का झंझट। अपने मोबाइल से ही पैसा ले सकते हैं। दुकानदारी कर सकते हैं, प्लास्टिक मनी से। तो इसके लिए अभियान चला रहे हैं, लोग बहुत समर्थन कर रहे हैं।
इस प्लास्टिक मनी में कुछ धोखाधड़ी के भी चांसेस हैं। नए नए में दुकानदारों को दिक्कत आएगी।
जब तक शातिर बुद्धि वाले लोग हैं तो हर जगह दूसरी भावना भी होती है। लेकिन हम यह दावे नहीं कर रहे हैं क्राइम नहीं हो सकता। लेकिन कम से कम झोला से ज्यादा सुरक्षित है। यहां ले जाने का झंझट तो नहीं है। 1980 के दशक में कंप्यूटर आने पर एक भ्रम फैलाया गया था कि बेरोजगारी फैल जाएगी, 1995 में मोबाइल फोन आने पर कहा गया कि इससे फिजूलखर्जी बढ़ जाएगी। वक्त ने दिखाया कि इन दोनों के सहारे देश में प्रगति आई है। 2016 में जब प्रधानमंत्री मोबाइल बैंकिंग को बढ़ावा दे रहे हैं तो कहा जा रहा है कि व्यापार ठप्प हो जाएगा। पर सच यह है कि कंप्यूटर एवं मोबाइल से जुड़ी हुई यह मोबाइल एप्प बैंकिंग क्रांति देश के हर व्यक्ति विशेषकर व्यापारियों के जीवन में खुशहाली लाएगी।

दिल्ली में पूर्ण राज्य का दर्जा का मुद्दा रहा है। भाजपा लगातार इसका समर्थन भी किया है। आपने इस लाइन से हटकर बयान दिया है।
दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं देने की बात, हमने नहीं की। ऐसे महत्वपूर्ण फैसले करने से पहले उसमें ऐसे सख्त प्रावधान किए जाएं, जिससे उसका कोई दुरुपयोग न कर सके। यदि अरविंद केजरीवाल जैसे लोग मुख्यमंत्री रहे और सख्त प्रावधान नहीं किए गए, तो देश के सामने संकट खड़ा हो जाएगा। दिल्ली के मुख्यमंत्री धरने पर बैठ गए। मैं यह चाहता हूं कि यह बड़ा विषय है इसकी समीक्षा होनी चाहिए। अच्छी तरह से। मैंने इतना ही कहा है।
कैसी समीक्षा हो। इसको विस्तार से बताएं।
दिल्ली में क्या होना चाहिए। इसकी समीक्षा हो। मैं थोड़ी कहा कि इसको नहीं देना चाहिए। अब उनकी खलबली क्या है। इसको लेकर ट्विट किया। तो पहली बार सीएम होते हुए प्रदेश अध्यक्ष से ट्विट में पिछड़ गए। मुझे भी दुख हुआ कि अरविंद केजरीवाल ट्विट में पिछड़ जाए। दो दिन पहले भी एक घटना हुई। एक मेरा फर्जी आईडी से उन्होंने निकाला की मनोज तिवारी ने लड़कियों के बारे में खराब बोला। अब वह फर्जी आईडी थी। तो अगर सीएम के पद पर बैठा व्यक्ति फर्जी चीजों के आधार पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का विरोध करना चाहे तो कितना चिंताजनक बाते हैं। हमारी कमी निकालो, हमारी गलती निकालों। मैंने बिल्कुल नहीं कहा कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं दीजिए। ना ही यह कहा कि दे देना चाहिए। मैंने कहा कि इसकी समीक्षा होना चाहिए। अरविंद केजरीवाल ने जो व्यवहार दिखाया है भारत की राजधानी चूंकि दिल्ली है तो भारत की राजधानी होनी चाहिए। बिहार, गुजरात, महाराष्ट्र की अपनी राजधानी है, तो भारत की राजधानी कहां है। मैंने इतना ही कहा की इसकी समीक्षा होनी चाहिए।

इस विषय को लेकर काफी राजनीति होती रही है दिल्ली में।
बिल्कुल छोटा विषय नहीं है। बहस होनी चाहिए। हम आपको बता दें कि कोई भी पार्टी हमेशा के लिए नहीं होती सत्ता में। संघीय ढ़ांचे की सरकार होती है। ये मुद्दा तो भाजपा का है लेकिन उसमें रोड़ा केजरीवाल बन रहे हैं। वे गणतंत्र दिवस रोकने में लगे रहे। अगर गणतंत्र दिवस का परेड रोकना चाहते हैं तो सीएम के रूप में तो दिल्ली को पूर्ण राज्य बनने में खुद रोड़ा बने हैं। अगर वह पीएम को रोक दें कि नहीं निकलने देंगे। हमारा काफिला निकल रहा है। यह कोई सोच सकता कि गणतंत्र दिवस के विरुद्ध कोई मुख्यमंत्री धरने पर बैठ जाएगा। यह सत्य है कि वे बैठे हैं अरविंद केजरीवाल खुद याद करें। उनको याद है कि नहीं। वे हर बात कहकर भूल जाते हैं। तो याद करें की वहीं बैठे थे। गणतंत्र का विरोध करने मुख्यमंत्री बैठे तो पूर्ण राज्य के दर्जे का खुद ही बाधक बन रहे हैं। मेरे कहने का मकसद है कि गणतंत्र दिवस विरोध करने के बाद जो स्थिति बनी है, इसकी समीक्षा होनी चाहिए। इसका कॉलम, क्या प्रावधान होना चाहिए। इसपर विचार होना चाहिए। मैं सेलिब्रिटी बनके आया हूं। इतनी समझदारी से बात कर रहा हूं। ये लोग कहते हैं कि इतने दिन से राजनीति कर रहे हैं और झूठ को लेकर ट्वीट कर रहे हैं।
यहीं कह रहे हैं ना कि अरविंद केजरीवाल लगातार आप पर हमले कर रहे हैं। 
मुख्यमंत्री पद की गरीमा होती है। मुख्यमंत्री बोले उसकी प्रामाणिकता होनी चाहिए ना। अब मुख्यमंत्री साहब इतनी खलबली में हैं मनोज तिवारी पर दो-दो अटैक किए। दोनों फेक। दोनों असत्य है। मेरा उनसे अपेक्षा है कि वे सत्यता की जांच कर ही कोई आरोप लगाएं। अभी मैं रियल्टी चेक में हूं। उन्होंने 70 वादे किए हैं, अभी वह पूछना बाकी है।
दिल्ली बीजेपी की कमान संभालते ही आपने भी दिल्ली सरकार पर हमला बोला है।
दिल्ली में डीटीसी में बड़ा घोटाला हुआ है। किराये के तौर पर तो दस बीस पचास और सौ के नोट आए। लेकिन बैंकों में पांच सौ और हजार के नोट जमा कराये जा रहे है। इस बात का खुलासा होना चाहिए कि यह किसका पैसा था।आम आदमी पार्टी आप पर तंज कसने में लगी है।
दिल्ली को लोग बहुत खुश है। हंस रहे हैं लोग। पूरी दिल्ली हंस रही है खुशी की हंसी है। आम आदमी पार्टी के बहुत से लोग है जो बोलते हैं बहुत अच्छा हुआ। अब सही हुआ है। तो नरेंद्र मोदी, अमित शाह वही करते हैं, जो देश समाज के लिए सही हो। दिल्ली हर वर्ग के लोग, आज गांव के लोग हैं। बंजारा समाज, धानुक समाज, रेल पटरी समाज सभी लगातार मिलने आ रहे हैं। पहले नहीं आते थे। लेकिन अब जो हताशा है, इसलिए आ रहे हैं। पूरे दिल्ली में, जिस कोने में जाइए। जो पार्टी में नहीं है वह भी होर्डिंग लगाकर बैठा है। घर में साउंड सिस्टम लगाना पड़ा है प्रतिदिन हजारों लोग हमसे मिल रहे हैं।


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