दिव्यांग ने जनरल कोच में की यात्रा, रेलवे पर 10 हजार जुर्माना

October 12, 2017, 5:45 pm
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जबलपुर। रिजर्वेशन होने के बावजूद वापी से जबलपुर तक की यात्रा जनरल कंपार्टमेंट में जमीन पर बैठकर पूरी करनी पड़ी। इस असुविधा के कारण स्वास्थ्य भी खराब हो गया। कंज्यूमर फोरम ने रेल यात्री के साथ सेवा में कमी के इस रवैये को आड़े हाथों लिया।

इसी के साथ मुख्य वाणिज्य प्रबंधक पश्चिम रेलवे, मंडल रेल प्रबंधक वाणिज्य पश्चिम रेल और मुख्य वाणिज्य प्रबंधक (टीसी) जबलपुर पर 10 हजार का जुर्माना लगा दिया। मानसिक पीड़ा के एवज में इस जुर्माना राशि के अलावा टिकट की राशि 144 रुपए और 3 हजार रुपए मुकदमे का खर्च भी भुगतान करने कहा गया है।

फोरम के चेयरमैन सुनील कुमार श्रीवास्तव और सदस्य कु.अर्चना शुक्ला ओर योमेश अग्रवाल की न्यायपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान शिकायतकर्ता माढ़ोताल जबलपुर निवासी श्रीमती चन्द्रा जैन की ओर से पक्ष रखा

क्या था मामला- शिकायतकर्ता चंद्रा जैन जबलपुर निवासी हैं। 23 फरवरी 2010 को उन्होंने वापी से जबलपुर लौटने का आरक्षण 8 मार्च 2010 के लिए करवाया था। शिकायतकर्ता के साथ ही सफर करने वाले एक अन्य व्यक्ति को कंफर्म टिकट रेलवे द्वारा प्रदान किया गया। ट्रेन क्रमांक-9049 बांद्रा राजेन्द्र नगर एक्सप्रेस का कंपार्टमेंट नंबर-एस-15, बर्थ क्रमांक- 1 और 2 आरक्षित की गईं। 67 वर्षीय वृद्घा चन्द्रा जैन 40 प्रतिशत विकलांग होने के कारण अपने साथ एक सहायक एनसी जैन को भी ले जा रही थीं।

कुल किराया 240 रुपए प्रदान किया गया। जब निर्धारित तिथि को प्लेटफॉर्म पहुंची तो वापी स्टेशन पर ट्रेन आने के 2 मिनट पहले यह घोषणा की गई कि ट्रेन में कोच नंबर-15 नहीं लगाया गया है। लिहाजा, प्लेटफॉर्म में मौजूद टीटीई से जानकारी चाही गई, तब उसने अपनी असमर्थता व्यक्त की कि वह शिकायतकर्ता व उसके सहयोगी को किसी भी अन्य स्लीपर कोच में बर्थ आवंटित नहीं कर सकता।

ऐसा इसलिए क्योंकि अन्य स्लीपर कोच में कोई भी सीट खाली नहीं है। चूंकि जबलपुर आना अनिवार्य था, अतः वापी से जबलपुर तक 972 किलोमीटर की यात्रा 18 घंटे तक जनरल कंपार्टमेंट के फर्श पर बैठकर पूरी करनी पड़ी। जबलपुर पहुंचकर इस बारे में स्टेशन मास्टर के कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई गई। जब कोई नतीजा नहीं निकला तो लीगल नोटिस भी भेजा गया।

56 हजार 154 रुपए का ठोंका था दावा- चन्द्रा जैन ने फोरम की शरण लेकर 56 हजार 154 रुपए का दावा ठोंका था। रेलवे की ओर से बजाए मूल प्रश्न का उत्तर देने के बार-बार क्षेत्राधिकार का बिन्दु रेखांकित कर केस खारिज किए जाने पर बल दिया गया। लेकिन फोरम ने रेलवे की आपत्ति को दरकिनार कर सुनवाई पूरी की। कोर्ट ने कंफर्म रिजर्वेशन वाली टिकट के बावजूद यात्री को हुई परेशानी को सीधे तौर पर सेवा में कमी माना।

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