बाप-बेटे के झगडे से दुविधा में उम्मीदवार

January 7, 2017, 4:46 pm
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लखनऊ- नये वर्ष की अल सुबह चरम पर पहुंचे बाप-बेटे के झगडे से अब सबसे ज्यादा परेशान दोनो खेमो से घोषित उम्मीदवार दिखायी दे रहे हैं। मुलायम सिंह यादव खेमे ने 393 उम्मीदवारों की सूची घोषित की है, जबकि अखिलेश खेमे ने भी करीब तीन सौ प्रत्याशियों का ऐलान कर दिया है।

एक सौ पचास से अधिक उम्मीदवार ऐसे हैं जिनका नाम दोनो की सूची में है। जिन उम्मीदवारों का नाम दोनो सूची मे हैं, उन्हें तो खास फर्क नहीं पडा है, लेकिन जिनका नाम किसी एक में है वे दुविधा में हैं। किसी एक सूची में जिसका नाम है वह दोनो खेमो में सुलह-समझौते की चल रही कोशिशों पर पैनी नजर रख रहा है। उन्हें इस बात की आशंका है कि दोनो खेमों में एक होने पर वह शायद ही प्रत्याशी बन पायें, ऐसे में उनका क्या होगा। इसीलिए चुनाव की घोषणा के बावजूद ज्यादातर उम्मीदवारों ने अपने प्रचार अभियान की विधिवत शुरुआत नहीं की है। 

इस बीच मुलायम सिंह यादव खेमे की बैठक कल देर रात तक जारी रही।

मुलायम के साथ बैठक में शिवपाल सिहं यादव और अमर सिंह भी शामिल रहे जबकि अखिलेश यादव ने अपने खेमे के लोगों को क्षेत्र में जाने के लिए कह दिया है।

दोनो में सुलह समझौते के प्रयासों के बीच कानूनी दांवपेंच भी चल रहा है। कानूनी दांवपेंचों को आधार मानकर जानकार दोनो खेमो में सुलह समझौते की संभावना से इनकार कर रहे हैं। उधर अखिलेश खेमे के दलवीर सिंह, नरेश अग्रवाल और मुलायम खेमे से अमर सिंह के आये बयानो से भी लगने लगा है कि दूरियां और बढेंगी ही। बीच बचाव की कोशिश में लगे सपा के वरिष्ठ नेता मोहम्मद आजम खां का प्रयास अभी जारी है। आजम खां का कहना है कि पिता-पुत्र को मिला सके तो वह अपने जीवन की सबसे बडी उपलब्धि मानेंगे। बताते चलें कि समाजवादी पार्टी में चल रही घमासान के बीच एक जनवरी को अखिलेश खेमे ने जनेश्वर मिश्र पार्क लखनऊ में राष्ट्रीय प्रतिनिधि सम्मेलन बुलाकर मुख्यमंत्री को पार्टी का अध्यक्ष घोषित कर दिया गया था। उसी दिन इसी खेमे ने शिवपाल सिंह यादव को भी प्रदेश अध्यक्ष से हटाकर नरेश उत्तम को यह कुर्सी सौंप दी थी। नरेश उत्तम ने कार्यभार कुछ देर बाद ग्रहण कर लिया था। तभी से दोनो खेमो में सुलह समझौते के प्रयास के साथ ही कानूनी दांवपेंच भी चल रहा है।

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