Movie Review: दिल की कम सरकार की बात ज्‍यादा है 'टॉयलेट एक प्रेम कथा'

August 11, 2017, 5:39 pm
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नई दिल्‍ली: डायरेक्टर श्री नारायण सिंह

कलाकार अक्षय कुमार, भूमि पेडणेकर, सुधीर पांडेय और अनुपम खेर

रेटिंग   3.5

बॉलीवुड में कई विषयों पर फिल्‍में बनती हैं, लेकिन टॉयलेट जैसे विषय को बड़े पर्दे पर एक फिल्‍म के रुप में उतारना काबिले तारीफ है. सदियों पुरानी समस्या को इस तरह लाना समय की मांग थी. 'टॉयलेट एक प्रेम कथा' में डायरेक्टर ने अच्छे विषय को अच्छे ढंग से दिखाने की कोशिश की है लेकिन फिल्‍म को फिल्‍म ही रहने देना चाहिए, सरकारी एजेंडा नहीं बनाना चाहिए. बस, यही बात इस फिल्‍म में खटक जाती है. 'टॉयलेट एक प्रेमकथा' डायरेक्टर श्री नारायण सिंह की ये डेब्यू फिल्‍म है लेकिन इस निर्देशक में जबरदस्‍त संभावनाएं नजर आ रही हैं. अक्षय और भूमि की यह फिल्‍म लोगों को शौचालय की जरूरत का एहसास जरूर कराएगी.

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कहानी: यह एक पंडित परिवार में जन्‍मे केशव की कहानी है, जो साइकिल की दुकान चलाता है. वह बिंदास है और ब्रेकअप भी बड़े अंदाज में करता है. केशव की राय है कि 'पराया टीवी और पराई बीवी कभी ऑन न करना.' लेकिन जब केशव की शादी होती है तो बीवी टायलेट की मांग करती है लेकिन पंडित पिता इसके लिए तैयार नहीं होते. पत्‍नी के प्‍यार में दीवाना केशव इसके लिए जुगाड़ करता है लेकिन उसे  कामयाबी हाथ नहीं लगती और फिर शुरू होती है शौचालय बनाने की जद्दोजहद.

फिल्म का फर्स्ट हाफ जहां मलाई की तरह चलता है, वहीं इंटरवेल के बाद फिल्म को देखकर दिमागी कब्ज का एहसास होने लगता है, क्योंकि यहां फिल्म, फिल्म न रहकर संदेश का ओवरडोज बन जाती है. कुछ सीन तो ऐसे लगते हैं जैसे मौजूदा सरकार के काम-काज की तारीफ करने के लिए ही गढ़े गए हैं. यही नहीं फिल्‍म में कहीं न कहीं डायरेक्टर ने सरकार के अलग-अलग अभियानों के साथ जोड़ने की कोशिश की है.

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