बईमान-अनैतिक दुनिया का हथकंडा बन गयी गरीब जनता

December 6, 2016, 1:16 pm
Share on Whatsapp
img

विष्णुगुप्त

यह बईमान दुनिया है, यह अनैतिक दुनिया है, यह भ्रष्ट दुनिया है, यह दांव-पेंच वाली दुनिया है, यह लुटेरों की दुनिया है। यहां 100 में 95 बईमान है, यहां 100 में 95 अनैतिक है, यहां 100 में 95 भ्रष्ट है, यहां 100 में 95 दांव-पेंच वाले है, यहां 100 में 95 लुटेरे है। नैतिकता और शिष्टाचार लगभग विलुप्त होता जा रहा है। जनता से लेकर नौकरशाही, राजनेता और न्यायविद् तक बईमान हो चुके हैं, अनैतिक हो चुके हैं, भ्रष्ट हो चुके हैं, दांव-पेच वाले हैं, लुटेरे हैं। ऐसी स्थिति में कोई भी ईमानदार, नैतिक और जनकल्याण कारी नीति लागू करना कितना मुश्किल काम है, यह समझ सकते हैं़। यही कारण है कि हमारे देश में कोई भी ईमानदार, नैतिक और जनकल्याणकारी नीतियां और योजनाएं अर्थविहीन हो जाती है, लक्ष्य से भटक जाती है और भ्रष्टाचार में डूब जाती है। कोई भी ईमानदार सरकार अपनी नीतियों और कार्यक्रमों को लागू कराने में असमर्थ होती हैं। आखिर क्यों। जब हम इस प्रश्न का चाकचैबंद और निष्पक्ष उत्तर देखेंगे तो साफतौर पर पायेगे कि सरकार की ईमानदार,नैतिक और जन कल्याण कारी योजनाओं व नीतियों का समर्थन व सहयोग जनता व नौकरशाही से मिल ही नहीं पाता है, सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि निश्चित तौर पर न्यायविद् भी किसी न किसी रूप से अनैतिक, बईमान, भ्रष्ट लोागों का रक्षाकवच बन खडे हो जाते हैं। क्या यह सच नहीं है कि सरकार की सभी नीतियों और कार्यक्रमों की न्यायिक समीक्षा होती है, भ्रष्ट और बईमान लोगों को सजा देने का अंतिम अधिकार न्यायपालिका को है। हमारा लोकतंत्र  दुनिया का सर्वश्रेष्ट माॅडल है और इस पर गर्व भी हम करते हैं पर सच्चाई यह है कि लोकतंत्र के विभिन्न खंभों में तालमेल का अभाव और उनमें जिम्मेदारी का अभाव, कदाचार और अनैतिक लोगों के भरमार के कारण अपराधी, धनपशु और देश के अन्य लुटेरे लाभाथी बन जाते हैं।
नोटबंदी को ही ले लीजिये। नोटबंदी एक क्रांतिकारी विचार है, कालाधन पर चोट करने वाली नीति है, देश की अर्थव्यवस्था को मजबूर करने वाली नीति है, अपराधियों, बईमानों और लुटेरों के राज पर प्रहार करने वाली नीति है, कालाधन रखने वालों को कानून का पाठ पढाने वाली नीति है, आतंकवाद को जमींदोज करने वाली नीति है,हवाला बाजार को नेस्तनाबुद करने वाली नीति है, गरीबों और आम आदमी को महंगाई से निजात दिलाने वाली नीति है। ऐसी क्रांतिकारी और जनकल्याणकारी नीति का दुनिया भर में समर्थन मिल रहा है और दुनिया के कई देशों के शासकों ने भी इस नीति को सराहा है पर अपने देश में अनैतिक, बईमान, दांवपेंच वाले और भ्रष्ट लोग किस प्रकार से एक हो गये और किस प्रकार से काला धन सफेद करने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाये हैं, यह भी जगजाहिर है। नोटबंदी लागू करने से पहले सरकार यह उम्मीद नहीं लगा सकी थी कि जिस जनता के लिए यह क्रांतिकारी और कल्याणकारी नोटबंदी की नीति ला रही है वहीं जनता आतंकवादियों के पक्ष में खड़ी हो जायेगी, वही जनता हवाला कारोबारियों के पक्ष में खडी हो जायेगी, भ्रष्ट लोगों के पक्ष में खडी हो जायेगी, कालेधनार्थियों के पक्ष मे खडी हो जायेगी। नोटबंदी के पहले दिन से यह अहसास हो गया था कि कहीं न कहीं दाल में काला है और आम जनता अनैतिकबाजों, भ्रष्टों और अर्थव्यवस्था के लुटेरों का हथकंडा बन चुकी है। भाड़े पर बैंकों की लाइन में खडे होकर गरीब जनता अनैतिकबाजों, भ्रष्टों और अर्थव्यवस्था के लुटेरों का कालाधन सफेद कर रही थी और इसके बदले में उन्हें दिहाडी मिल रही थी। तत्कालीक लाभ के लिए आम जनता आत्मघात की नीति पर उतर आयी।जन-धन योजना जब सरकार ने लागू की थी तब सरकार को यह उम्मीद भी नहीं रही होगी कि यही जन-धन योजना कालाधनार्थियों का रक्षाकवच बन जायेगी, एक हथकंडा बन जायेगी और सरकार की नोटबदी योजना के लक्ष्य को भटका देगी। नोटबंदी के पूर्व खाली जनधन के खाते अचानक धन से लबालब हो गये। जो खाता खाली था उस खाते में अचानक धन की वर्षा होना क्या संकेत देती है। जाहिर तौर पर जनधन खाते में जमा पैसा गरीब के खून-पसीने की कमाई नहीं हो सकती है। अगर खून-पसीने की कमाई थी तो फिर नोटबंदी के बाद ही खाते में पैसे क्यों और कैसे आये।जनधन खाते मे कितने पैसे अवैध तौर पर जमा हुए हैं, इसकी सूची अभी तक नहीं आयी है पर एक आकलन के अनुसार लखों हजार करोड रूपये जमा होने की आशंका जतायी गयी है। उन राज्यों में जनधन खाते में अधिक पैसा जमा हुए हैं जिन राज्यों के नेता नोटबंदी के खिलाफ जमकर चिल्ला रहे हैं, जमकर कोश रहे हैं, जमकर जनविरोधी बता रहे है और नोटबंदी के खिलाफ अपनी राजनीति चमका रहे हैं। जनधन खाते में सर्वाधिक पैसा जमा पश्चिम बंगाल में हुआ है। पश्चिम बंगाल में मजहब के नाम पर अरब देशों से पैसे आ रहे हैं, अरब देशों से आने वाले पैसों का कोई लेखा-जोखा नहीं है। अरब देश से आने वाले पैसों पर चोट होगा तो फिर ममता बनर्जी की मुस्लिम तुष्टीकरण की नीति कैसे सफल होगी। क्या यह सच नहीं है कि ममता बनर्जी नोटबंदी के खिलाफ कुछ ज्याद ही सक्रिय नहीं है, कुछ ज्यादा ही आक्रामक नही है? ममता बनर्जी की नोटबंदी के खिलाफ तेजाबी प्रतिकिया जताने का अर्थ यही है कि वह अपने राज्य के जन धन खाते में जमा काले धन का संरक्षण करना चाहती है, इसलिए वह केन्द्रीय सरकार पर हमला बोलने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपना रही है। लालू और मुलायम की भी यही कहानी है।सूचनाएं यहां तक है कि बैंक कर्मी भी लालच में आकर काले धन को सफेद करने के गुनहगार है। दिल्ली से लेकर देश के अन्य जगहों पर कई लोगों के पास दो-दो हजार के लाखों नोट पकडे गये है जबकि बैंकों की सीमाएं तय है। एक खातेधारी को महीना और सप्ताह में कितना धन निकालने की इजाजत है, यह भी दायरे में है। जब किसी के पास दो-दो हजार के लाखें नोट बरामद होंगे तो शक की सुई बैंककर्मियों के खिलाफ घूमेगी ही। यह बात भी फैली है कि बैंककर्मी पांच सौ और हजार के नोट बदलने में कालाधनार्थियों के सहयोगी बने हुए हैं। यह बात पूरी तरह से झूठ भी नहीं हो सकती है। खासकर काॅपरेटिव बैंको पर आरोप लगे हैं। कई काॅपरेटिव बैंकों में नेशनल बैंकों से कहीं ज्यादा नोट बदले गये हैं। जबकि काॅपरेटिव बैंकों की पहुंच और दायरा नेशनल बैंकों की अपेक्षा कमतर है। इसके अलावा पेट्रोल पंप भी हथकंडा बने हैं। पेट्रोल पंप के मालिक भी कमिशन लेकर काले नोट सफेद किये हैं। इसके साथ ही साथ कई छोटी-बडी कंपनियां भी काले नोट को कमीशन लेकर अपने खाते में काले नोट जमा कराये हैं। उल्लेखनीय है कि कंपनियां आय और व्यय का व्यौरा देते समय बैंक खाते में जमा राशि पर खर्च की अधिक सीमा दिखा कर टैक्स से बच जाती हैं। ऐसा करने मे चार्टर एकांउटेंड मोहरा बनते हैं।

नोटबंदी को दुरूस्त करने और कालेधन वालों के अपराध के खिलाफ कई कानून आने वाले हैं। सरकार ने घोषणा कर रखी है कालेधन को सफेद करने वाले को बच निकलने नहीं दिया जायेगा, उनके अपराध की सजा जरूर सुनिश्चित की जायेगी और उनसे पाई-पाई वसूला जायेगा। सरकार की यह नीति कठोर है। पर यह देखना चाहिए कि सरकार की कोई नीति पूर्ण रूप से चाकचैबंद नहीं होती है। बईमान, अनैतिक और भ्रष्ट लोग उस नीति का तोड निकाल ही लेते हैं। जैसे अपराधियों, बईमानों और भ्रष्टों ने जन धन खाते को हथकंडा और मोहरा बना दिया। नोटबदी सफल होने और कालेधन पर अंकुश लगने पर महंगाई घटनी तय है। महंगाई घटने से आम जनता ही फायदेमंद रहेगी पर आम जनता तो कालाधनार्थियों का हथकंडा बन और मोहरा बन गयी है।

Similar Post You May Like

Around The World

loading...

More News